नगर विकास विभाग द्वारा क्रियान्वित महत्वपूर्ण योजनाएं

केन्द्र पुरोनिधानित योजनाएं

राज्य सेक्टर/जिला सेक्टर की योजनाएं

 

 

वाह्य सहायतित योजनाएं:

 

जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिनूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) कार्यक्रम

शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नगरीय क्षेत्रों में विभिन्न अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु वर्ष 2005 से जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन (जे0एन0एन0यू0आर0एम0) कार्यक्रम क्रियान्वित की जा रही हैं। इस योजना के चार कार्यान्श हैं-

(1) अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर एण्ड गवर्नेन्स (यू.आई.जी.)
(2) अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम फार स्माल एण्ड मीडियम टाउन्स (यू.आई.डी.एस.एस.एम.टी.)
(3) बेसिक सर्विसेज् फार अर्बन पुअर्स (बी.एस.यू.पी.)
(4) इन्टीग्रेटेड हाउसिंग एण्ड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (आई.एच.एस.डी.पी)

उक्त कार्यान्शों में से यूआईजी व यूआईडीएसएसएमटी कार्यान्श का क्रियान्वयन नगर विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है,  जिसके लिये निदेशक, स्थानीय निकाय, उ0प्र0, लखनऊ को स्टेट लेबल नोडल एजेंसी (एसएलएनए) नामित  किया गया है। शेष 02 कार्यान्श का क्रियान्वयन नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम विभाग द्वारा किया जा रहा है, जिसके लिये निदेशक, सूडा को एसएलएनए नामित किया गया है।


जेएनएनयूआरएम- यूआईजी कार्यान्श:

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जेएनएनयूआरएम कार्यक्रम के यूआईजी कार्यान्श में देश के कुल 63 शहरों में से उत्तर प्रदेश के 07 शहर यथा- कानपुर, लखनऊ, आगरा, वाराणसी, मेरठ, इलाहाबाद तथा मथुरा सम्मिलित हैं। यूआईजी कार्यान्श में परियोजनाओं  वित्त पोषण केन्द्र सरकार, राज्य सरकार तथा स्थानीय निकाय के मध्य 50:20:30 के अनुपात में निर्धारित है। मथुरा हेतु यह अनुपात 80:10:10 है। यूआईजी कार्यान्श में स्वीकृत परियोजनाओं के सापेक्ष भारत सरकार से धनराशि एडीशनल सेन्ट्रल एसीसटेंस (एसीए) के रूप में 04 किश्तों में प्राप्त होती है। निकाय अंश की पूर्ति सम्बन्धित नागर निकाय द्वारा किए जाने की व्यवस्था है। यदि निकाय अपने संसाधनों से अपना अंश वहन करने में असमर्थ है तो संबंधित निकाय को उनके अनुरोधानुसार निकाय अंश की धनराशि रिवाल्विंग फण्ड से ब्याज रहित ऋण के रूप में स्वीकृत करने की व्यवस्था है। परियोजना हेतु अवमुक्त धनराशि का 70 प्रतिशत उपयोग हो जाने के पश्चात् भारत सरकार में उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रेषित किया जाता है, जिसके परिक्षण के पश्चात् भारत सरकार द्वारा आगामी किश्त स्वीकृत की जाती है। परियोजनाओं के स्वतंत्र पर्यवेक्षण हेतु आई.आर.एम.ए. IRMA- Independent Review and Monitoring Agency गठित है। जेएनएनयूआरएम कार्यक्रम के यूआईजी कार्यान्श की मिशन अवधि के कुल आवंटन रु० 769.41 करोड़ के सापेक्ष रु० 5392.47 करोड़ की 35 परियोजनाए  भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की जा चुकी हैं तथा अब तक कुल रु० 1787.49 करोड़ भारत सरकार से एसीए प्राप्त हो चुका है।

यूआईजी कार्यान्श में नगरीय परिवहन परियोजना के अन्तर्गत मिशन शहरों में नगरीय बसों का संचालन कराया जा रहा है। इस हेतु भारत सरकार द्वारा स्वीकृत 07 परियोजनाओं की 1310 बसों के सापेक्ष 1140 बसों का संचालन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम द्वारा कराया जा रहा है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 725 करोड़ की बजट व्यवस्था है।


जेएनएनयूआरएम- यूआईडीएसएसएमटी कार्यान्श:

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शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जेएनएनयूआरएम कार्यक्रम के अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेन्ट स्कीम फार स्माल एण्ड मीडियम टाउन्स (यूआईडीएसएसएमटी) कार्यान्श के अन्तर्गत 10 लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। यूआईडीएसएसएमटी कार्यान्श में परियोजनाओं का वित्त पोषण केन्द्र सरकार, राज्य सरकार तथा स्थानीय निकाय के मध्य 80:10:10 के अनुपात में निर्धारित है। इस कार्यान्श के अन्तर्गत प्रदेश के 46 शहरों में विभिन्न शहरी अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु 64 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं यूआईडीएसएसएमटी कार्यान्श के अन्तर्गत मिशन अवधि के कुल आवंटन रु० 947.92 करोड़ के सापेक्ष रु० 1169.63 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं तथा अब तक रु० 757.54 करोड़ भारत सरकार से एसीए के रूप में निर्गत हो चुका है।

शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में इस हेतु रु० 250.00 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।

सेटेलाइट टाउन योजना-यूआईडीएसएसटी:

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भारत के 07 मेगा शहरों कोलकता, मुम्बई, दिल्ली, चेन्नई, बंगलोर, हैदराबाद एवं अहमदाबाद के आसपास के किसी शहर को उस मेगा शहर के काउन्टर मैगनेट आफ मिलियन प्लस सिटीज्/सेटेलाइट टाउन के रूप में विकसित किये जाने का निर्णय भारत सरकार में सम्पन्न बैठक दिनांक 05.10.2009 लिया गया था। इसी क्रम में दिल्ली के काउन्टर मैगनेट/सेटेलाइट टाउन के रूप में विकसित किये जाने हेतु उत्तर प्रदेश के पिलखुवा नगर (जनपद गाजियाबाद) को चयनित किया गया है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-24 पर दिल्ली से लगभग 35 किमी दूरी पर स्थित है। पिलखुवा नगर  की अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिये जलापूर्ति, सीवरेज तथा सालिड वेस्ट मैनजमेंट की 03 परियोजनाओं, जिनकी कुल लागत रु० 67.53 करोड़ है, को भारत सरकार द्वारा स्वीकृत किया गया है। परियोजनाओं का वित्त पोषण यूआईडीएसएसएमटी की भांति केन्द्र सरकार, राज्य सरकार एवं निकाय के मध्य 80:10:10 के अनुपात में निर्धारित है। स्वीकृत परियोजनाओं के सापेक्ष भारत सरकार से धनराशि एडीशनल सेन्ट्रल एसीसटेंस (एसीए) के रूप में प्राप्त होती है।

शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जा रहा है तथा योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 10.00 करोड़ का आय-व्ययक प्राविधान किया गया है।
 

 प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम:

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नदियां पेयजल आपूर्ति की न केवल प्रमुख स्रोत हैं वरन् आस्था की भी प्रतीक हैं। नदियों को प्रदूषण मुक्त किया जाना नितान्त आवश्यक है। इस हेतु नदी प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम भारत सरकार की सहायता से क्रियान्वित किया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत प्रदेश की नदियों गंगा, यमुना तथा गोमती के तट पर स्थित 23 नगरों के अन्तर्गत नदी प्रदूषण नियंत्रण के कार्य कराये जा रहे हैं। इससे तहत् प्राप्त होने वाला केन्द्रांश सीएसएस के रूप में सीधे कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश जल निगम को प्राप्त होता है। परियोजनाओं का वित्त पोषण केन्द्र सरकार  एवं राज्य सरकार के मध्य 70:30  के अनुपात में निर्धारित है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में इस योजना हेतु 15.00 करोड़ का बजट प्रावधान है।
 

झील संरक्षण कार्यक्रम:

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प्रदेश की नदियों को प्रदूषण-मुक्त किये जाने के साथ ही साथ प्रमुख झीलों को भी प्रदूषण-मुक्त किये जाने हेतु भारत सरकार की सहायता से झील संरक्षण योजना क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश की 2 झीलों/तालों - रामगढ़ ताल (गोरखपुर नगर) व मानसी गंगा ताल (गोवर्धन नगर-जनपद मथुरा) की परियोजनाओं को भारत सरकार द्वारा स्वीकृत किया जा चुका है। इनके अतिरिक्त 02 अन्य परियोजनायें-लक्ष्मी ताल (झांसी नगर) तथा मदनसागर ताल (महोबा नगर) प्रस्तावित की गयी हैं। मानसी गंगा परियोजना का कार्य पूर्ण होने की स्थिति में है। परियोजनाओं का वित्त पोषण केन्द्र सरकार  एवं राज्य सरकार के मध्य 70:30  के अनुपात में निर्धारित है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में इस योजना हेतु रु० 15.00 करोड़ का बजट प्रावधान है।
 

 राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के अन्तर्गत स्वीकृत परियोजनाएं:

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भारत सरकार द्वारा गंगा नदी को प्रदूषण से मुक्त करने हेतु माननीय प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (एनजीआरबीए) का गठन किया गया है। इसी क्रम प्रदेश में भी मा0 मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में राज्य नदी संरक्षण प्राधिकरण (एस.आर.सी.ए.) का गठन भी किया जा चुका है। मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में एक कार्यकारी (एक्जीक्यूटिव) समिति का भी गठन हो चुका है। राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण द्वारा यह लक्ष्य रखा गया है कि आगामी वर्षों में परियोजनाओं के लागू कर वर्ष 2020 से गंगा नदी में सीवेज बिना शोधित किये हुये निस्तारित नहीं किया जायेगा। परियोजनाओं का वित्त पोषण केन्द्र सरकार  एवं राज्य सरकार के मध्य 70:30  के अनुपात में निर्धारित है। प्रथम चरण में कानपुर, इलाहाबाद तथा वाराणसी नगरों की परियोजनाओं को प्राथमिकता पर लिया गया है, जिसमें इलाहाबाद तथा वाराणसी नगर की दो-दो परियोजनायें तथा कन्नौज, मुरादाबाद, गढ़मुक्तेश्वर नगर की एक-एक परियोजनाएं, कुल लागत रु० 1341.60 करोड़ है, स्वीकृत हुयी हैं जिसमें भारत सरकार का अंश रु० 1013.655 करोड़ तथा राज्य सरकार का अंश रु० 327.945 करोड़ है। योजना के अन्तर्गत परियोजना के कुशल संचालन हेतु राज्य स्तर पर स्टेट प्रोग्राम मैनेजमेन्ट गु्रप (एसपीएमजी) का गठन किया गया है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 70.00 करोड़ का प्रावधान है।
 

वाराणसी की अवसंरचना का सुधार:

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13वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के अन्तर्गत सहायता अनुदान के क्रम में वाराणसी नगर की अवसंरचना के सुधार हेतु जापान अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग अभिकरण के माध्यम से 03 परियोजनाएं यथा- घाट एवं कुण्डों के विकास के लिये रु० 45.00 करोड़, शहर के सिस वरूणा क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं के पूरक के रूप में ब्रान्च सीवर लाइन लगाने के लिये रु० 60.00 करोड़ तथा वाराणसी शहर में अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं के उन्नयन के लिये रु० 20.00 करोड़ क्रियान्वित हैं। इन परियोजनाओं के सापेक्ष वर्ष 2011-12 से 2014-15 तक 04 समानुपातिक किश्तों में धनराशि स्वीकृत की जायेगी।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-9 द्वारा किया जा रहा है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में इस  हेतु रु० 31.25 करोड़ का बजट प्रावधान है।

 

राज्य सेक्टर/जिला सेक्टर की योजनाएं

 आदर्श नगर योजना:

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प्रदेश के 01 लाख से कम जनसंख्या वाले ऐसे नगरीय निकायें, जो जेएनएनयूआरएम कार्यक्रम की यूआईडीएसएसएमटी कार्यान्श से वित्त पोषित नहीं हो पाई हैं, में अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु वित्तीय वर्ष 2007-08 में आदर्श नगर योजना की शुरूआत की गयी। योजनान्तर्गत नगरीय निकायों में अवस्थापना सुविधाओं यथा- पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज, सालिड वेस्ट मैनेजमेन्ट, स्लाटर हाउस, सड़क, मार्ग प्रकाश, सार्वजनिक सुविधाओं इत्यादि का विकास किया जाता है। इस योजना में राज्य सरकार तथा नागर निकाय के मध्य वित्त पोषण का अनुपात 90:10 निर्धारित है।
आदर्श नगर योजना के अन्तर्गत निकायों के चयन हेतु मा0 नगर विकास मंत्री जी की अध्यक्षता में एक समिति  गठित है, जिसमें नगर विकास, नियोजन, वित्त विभाग तथा निदेशक, सूडा, मुख्य नगर एवं ग्राम्य नियोजन, प्रबंध निदेशक, उ0प्र0 जल निगम सदस्य है एवं निदेशक, स्थानीय निकाय सदस्य सचिव है। निदेशक, स्थानीय निकाय को योजना की नोडल एजेन्सी भी नामित किया गया है। योजनान्तर्गत लागू दिशा-निर्देश के अनुसार निदेशक, स्थानीय निकाय द्वारा निकायों से प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण कर समिति के समक्ष चयन हेतु प्रस्तुत किया जाता है। प्रदेश की एक लाख से कम आबादी वाले कुल 578 नागर निकायों में से आदर्श नगर योजनान्तर्गत अब तक 396 निकायों का चयन किया जा चुका है जिनमें से 377 निकायों को उनकी कार्य योजना के सापेक्ष राज्यान्श की धनराशि किश्तों में स्वीकृत करते हुए अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया गया है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-8 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 156.00 करोड़ की बजट व्यवस्था है।
 

 नया सवेरा नगर विकास योजना (रिवाल्विंग फण्ड):

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जनहित से जुड़ी तात्कालिक आवश्यकता की परियोजनाओं तथा अवस्थापना सुविधाओं के विकास एवं सुदृढ़ीकरण करने के दृष्टिगत राज्य सरकार द्वारा निकायों की ब्याज रहित ऋण स्वीकृत करने हेतु वर्ष 2001 में रिवाल्विंग फण्ड का गठन किया गया है। इसका मूल उद्देश्य यह है कि निकायें अपनी आवश्यकता/ऋण वापसी की क्षमता के अनुसार रिवाल्विंग फण्ड से ब्याज रहित ऋण प्राप्त करके अपनी मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण/विस्तार करें तथा अपनी आय में वृद्धि करके स्वालम्बी बनें। निकायों को स्वीकृत उक्त ऋण की प्रतिपूर्ति निकायों को राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अन्तर्गत दी जाने वाले धनराशि से दस समान वार्षिक किश्तों में काटकर की जाती है। वर्तमान में यह योजना नया सवेरा नगर विकास योजना के नाम से क्रियान्वित हैयोजना से ऋण प्राप्त करने हेतु निकाय अपने बोर्ड/सदन द्वारा पारित प्रस्ताव/मांग पत्र एवं सक्षम स्तर से अनुमोदित कार्य योजना शासन को प्रस्तुत करती हैं। निकाय से प्राप्त प्रस्ताव/कार्य योजना पर विभागीय अधिकारियों की संस्तुति के उपरान्त मा0 नगर विकास मंत्री जी द्वारा धनराशि स्वीकृत करने के संबंध में निर्णय लिया जाता है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-9 द्वारा किया जाता है तथा योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 900.00 करोड़ की बजट व्यवस्था है।
 

 नगरीय सीवरेज कार्यक्रम:

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प्रदेश में नगरों में सीवरेज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इस योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। राज्य सेक्टर की कतिपय सीवरेज परियोजनाओं के अतिरिक्त उच्च स्तर से प्राप्त निर्देशानुसार समय-समय पर विभिन्न नगरों की आवश्यकता के दृष्टिगत महत्वपूर्ण जलोत्सारण परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता है। इसके अतिरिक्त मा0 मुख्यमंत्री जी/मा0 मंत्री जी द्वारा जलोत्सारण योजनाओं हेतु घोषणाओं/ शिलान्यासों के लिये भी धनराशि आवंटित की जाती है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 120.00 करोड़ की बजट व्यवस्था है।
 

नगरीय जल निकासी योजना:

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प्रदेश की नगरीय निकायों के क्षेत्रान्तर्गत जल भराव की समस्या के समाधान हेतु प्रदेश में नगरीय जल निकासी योजना वित्तीय वर्ष 2010-11 में प्रारम्भ की गयी है, जिसके अन्तर्गत नगरीय निकायों के क्षेत्रों में जल निकासी हेतु नालों के निर्माण हेतु धनराशि निकायों/कार्यदायी संस्थाओं को स्वीकृत की जाती है। शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 110.00 करोड़ की बजट व्यवस्था है।
 

 नगरीय पेयजल कार्यक्रम:

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प्रदेश की नागर स्थानीय निकायों पेयजलापूर्ति की व्यवस्था सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम के अन्तर्गत राज्य सेक्टर के निर्माणाधीन पेयजल परियोजनाओं तथा उच्च स्तर से प्राप्त निर्देशानुसार विभिन्न नगरों की आवश्यकता के दृष्टिगत महत्वपूर्ण पेयजल परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 130.00 करोड़ की बजट व्यवस्था है।

 

 नगरीय सड़क सुधार योजना :

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      उत्तर प्रदेश सर्वाधिक नगरीय निकायों वाला प्रदेश है। उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या की लगभग 22 प्रतिशत से अधिक आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती है। जनसंख्या वृद्धि,  क्षेत्रफल में विस्तार, ग्रमीण जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन, नगरीय यातायात में दिन-प्रतिदिन हो रही आदि के कारण शहरों की अवस्थापना सुविधाओं पर अत्याधिक दबाव आ गया है। नागर निकाय अपनें स्वयं के संसाधनों से नारिकों की मूलभूत सुविधाओं का समुचित विकास नहीं  कर  पा रहे है। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रदेश में सड़कों के सुधार व निर्माण हेतु वित्तीय वर्ष 2013-14 से "नगरीय सड़क सुधार योजना" प्रारम्भ किया गया है, इस योजना का उददेश्य प्रदेश की सड़कों पर बढ़ते दबाव आदि के कारण खराब हुई सड़कों को पुननिर्मित करने के साथ ही साथ निकायों में नई सड़कों का निर्माण भी है, जिससे प्रदेश के नागर निकायों में इस महत्वपूर्ण नागरिक सुविधा को सुदृढ़ किया जा सके।शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 150.00 करोड़ की बजट व्यवस्था है।

 

नगरीय पेयजल कार्यक्रम-जिला योजना (सामान्य):

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प्रदेश के समस्त जनपदों के नगरीय क्षेत्रों में शुद्ध पेयजलापूर्ति की व्यवस्था हेतु यह योजना क्रियान्वित है। योजनान्तर्गत इण्डिया मार्का-2 हैण्डपम्पों का अधिष्ठापन, रीबोर आदि के कार्य कराये जाते है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2012-13 में योजनान्तर्गत रु० 50.00 करोड़ की बजट व्यवस्था है।
 

नगरीय पेयजल कार्यक्रम-जिला योजना (एससीएसपी):

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प्रदेश के अनुसूचित जाति/जनजाति बाहुल्य नगरीय क्षेत्रों में नये हैण्डपम्प एवं रिबोर हैण्डपम्प के कार्य कराये जाते हैं। इस हेतु बजट व्यवस्था समाज कल्याण विभाग के आय-व्ययक में होती है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में योजनान्तर्गत रु० 25.00 करोड़ की बजट व्यवस्था है।
 

नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन योजना:

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राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के परिप्रेक्ष्य में नगर निगमों/नगर पालिका परिषदों में कूड़ा-करकट निस्तारण (नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन) की योजना का क्रियान्वयन किया जायेगा तथा सीवेज निस्तारण हेतु सीवेज ट्रीटमेन्ट प्लान्ट लगाए जायेंगे। 12वीं पंचवर्षीय योजना में राज्य सेक्टर के अन्तर्गत 176 नगरीय निकायों में पीपीपी मोड पर नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन की योजना क्रियान्वित किया जाना प्रस्तावित है। प्रथम चरण में 17 नगरीय निकायों में पीपीपी मोड पर नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन हेतु यह योजना प्रारम्भ की गयी है।
शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 195.00 करोड़ की बजट व्यवस्था है।
 

गोकुल बैराज के डूब क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण के प्रतिकर का भुगतान:

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मथुरा, वृन्दावन एवं आगरा जनपद की पेयजल समस्या के निदान हेतु जनपद मथुरा में गोकुल बैराज का निर्माण किया गया है। गोकुल बैराज डूब क्षेत्र से प्रभावित राजस्व ग्रामों की भूमि को अर्जित किये जाने हेतु प्रतिकर के रूप में  धनराशि का भुगतान हेतु वित्तीय वर्ष 2012-13 में रु० 36.07 करोड़ का बजट आवंटन किया गया है। शासन स्तर पर यह कार्य नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा सम्पादित किया जा रहा है।
 

स्वच्छ भारत मिशन:

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वित्तीय वर्ष 2015-16 में भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन का शुभारम्भ किया गया है। मिशन का उद्देश्य महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती 02 अक्टूबर, 2019 से पूर्व भारत में सम्पूर्ण स्वच्छता के लक्ष्य को प्राप्त किया जाना है। स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत नये घरेलू शुष्क शौचालयों का निर्माण कार्य, पिट शौचालय व अस्वच्छ शौचालयों को शुष्क शौचालयों में परिवर्तन का कार्य, सामुदायिक/ कम्यूनिटी शौचालयों का निर्माण, सार्वजनिक/पब्लिक शौचालयों का निर्माण एवं सालिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना का निर्माण तथा कैपिसिटी बिल्डिंग/ए.ओ.ई. व पब्लिक अवैरनेस/ आई.ई.सी. कार्य प्रस्तावित हैं। प्रदेश सरकार की कार्य योजना के सापेक्ष भारत सरकार द्वारा इस मद में प्रथम किश्त के रूप में ृ 86.07 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है, जिसे राज्य मिशन निदेशक अर्थात निदेशक, नगर निकाय निदेशालय को अवमुक्त किया जा चुका है।शासन स्तर पर यह कार्य नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा सम्पादित किया जा रहा है।
 

 

स्मार्ट सिटी मिशन कार्यक्रम:

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स्मार्ट सिटी मिशन कार्यक्रम वित्तीय वर्ष 2015-16 में भारत सरकार द्वारा प्रारम्भ किया गया है। मिशन का उद्देश्य नागरिकों की आकांक्षाओं, आवश्यकताओं एवं परिस्थि्ितयों के अनुरूप शहरों को आदर्श रूप में विकसित करना है। इसका एक अन्य उद्देश्य उन प्रमुख शहरों को प्रोत्साहित करना है जो अपने नागरिकों को गुणवत्तापरक जीवन स्तर के साथ स्वच्छ, स्थायी एवं सुविकसित वातावरण प्रदान करते हैं। योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 के लिये है। इसके अन्तर्गत देश के 100 शहरों को स्मार्ट शहरों के रूप में विकसित किये जाने की कार्य योजना है, जिनमें से 13 शहर उत्तर प्रदेश के होंगे। कार्यक्रम में अन्तर्गत वर्तमान में प्रदेश के 12 शहरों यथा- लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, आगरा, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, झांसी, सहारनपुर, गाजियाबाद व रामपुर का चयन प्रारम्भिक रूप से कर लिया गया है। दो अन्य शहरों - मेरठ व रायबरेली के चयन हेतु भारत सरकार से अनुरोध किया गया है। योजनान्तर्गत केन्द्र सरकार द्वारा रू0 100.00 करोड़ प्रत्येक निकाय को प्रतिवर्ष दिये जायेंग एवं उतनी ही धनराशि राज्य सरकार द्वारा उक्त कारपस में शामिल की जायेगी। स्मार्ट सिटी मिशन कार्यक्रम के लिये निदेशक, नगर निकाय, उ0प्र0 राज्य स्तरीय मिशन निदेशक हैं। मिशन निदेशक द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 में इस मद हेतु ृ 5124.00 करोड़ का आय-व्ययक प्रस्तावित किया गया है, जो अत्याधिक प्रतीत होता है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में स्मार्ट सिटी मिशन कार्यक्रम के अन्तर्गत 24.00 करोड़ केन्द्रांश के रूप में कार्य योजना बनाये जाने हेतु प्राप्त हुआ है। यह भी उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की कार्य योजना के अनुसार उक्त 100 शहरों में से प्रथम चरण में देश के 20 शहरों को द्वितीय चरण की प्रतियोगिता में चयनित किया जाना है। अतः इसके दृष्टिगत स्मार्ट सिटी मिशन कार्यक्रम के अन्तर्गत आगामी वित्तीय वर्ष 2016-17 में केन्द्रांश व राज्यांश के लिये अधिकतम 1000.00 करोड़ का आय-व्ययक प्रस्तावित किया जाना उचित होगा।शासन स्तर पर यह कार्य नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा सम्पादित किया जा रहा है।
 

 

अटल मिशन फार रिजुवनेशन एण्ड अर्बन ट्रांसफार्मेशन:

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वित्तीय वर्ष 2015-16 में भारत सरकार द्वारा यह योजना पूर्व संचालित कार्यक्रम जेएनएनयूआरएम के स्थान पर लायी गयी है। यह योजना 50000.00 करोड़ की है और इसकी अवधि 05 वर्ष है। वर्ष 2015-16 के लिये 10131.27 करोड़ की केन्द्रीय सहायता पूरे देश के लिये प्रस्तावित की गयी है। वर्ष 2015-16 में सुधार प्रबंधन हेतु प्रोत्साहन धनराशि का प्राविधान नहीं रखा गया है। इस कारण परियोजना लागत बजट का 90 प्रतिशत रखा गया है। वर्ष 2016-17 से प्रोत्साहन धनराशि का प्राविधान है। इस लिये प्रथम वर्ष में प्रस्तावित केन्द्रीय सहायता को भी आधार मानते हुए वर्ष 2016-17 के बजट हेतु परियोजना लागत वजट के 80 प्रतिशत के आधार पर आगणित करते हुए केन्द्रीय सहायता 1533.00 करोड़ आगणित की गयी है। अमृत योजना के दिशा निर्देशों में परियोजना की लागत में केन्द्रीय सहायता के उपरान्त अवशेष अंश राज्य सरकार/निकाय/निजी निवेश से किये जाने का प्राविधान है। यह भी निर्देश दिये गये हैं कि परियोजना लागत की कम से कम 20 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को देनी होगी। इसी को आधार मानते हुए राज्यांश की राशि 20 प्रतिशत के आधार पर आगणित करते हुए कुल अनुमानित राज्यांश ृ 626.00 करोड़ प्रस्तावित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा अभी कोई परियोजना प्रस्ताव स्वीकृत नहीं किये गये हैं। इसको आधार मानते हुए मिशन निदेशक, नगर निकाय निदेशालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 में ृ 2195.00 करोड़ केन्द्रांश एवं राज्यांश के रूप में प्रस्तावित किया गया है, जो अधिक प्रतीत हो रहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस मिशन के अन्तर्गत प्रदेश के 62 शहर आच्छादित हैं, अतः इसके दृष्टिगत अमृत योजना में आगामी वित्तीय वर्ष 2016-17 में  2000.00 करोड़ का आय-व्ययक प्रस्तावित किया जाना समीचीन होगा। इस मद में वित्तीय वर्ष 2015-16 में उपलब्ध बजट व्यवस्था 1000 (टोकन) के दृष्टिगत वित्तीय वर्ष 2016-17 में केन्द्रांश व राज्यांश को मिलाते हुए 2000.00 करोड़ का आय-व्ययक प्रस्तावित है। यदि भारत सरकार से अपेक्षित केन्द्रांश प्राप्त होता है तो यथावश्यकता अतिरिक्त बजट की व्यवस्था अनुपूरक बजट से करायी जायेगी।शासन स्तर पर यह कार्य नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा सम्पादित किया जा रहा है।
 

डा0 ए0पी0जे0 अब्‍दुल कलाम नगरीय सौर पुंज योजना:

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 प्रदेश में बढ़ रही विद्युत की मांग व विभिन्नत स्रोतो से विद्युत उत्पादन के अन्त्राल को कम किये जाने हेतु राज्यह सरकार द्वारा सौर ऊर्जा नीति के अन्तोर्गत सौर ऊर्जा के रूप में अक्षय ऊर्जा संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग किये जाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में नागर निकायों के अन्तर्गत सौर ऊर्जा पावर प्लांन्ट्स के माध्यम से सोलर लाईट सोलर हाईमास्ट लाइट तथा पेयजल की व्यवस्‍था हेतु नगर विकास विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं तथा वित्तीय वर्ष 2016.17 से प्रारम्भ डा0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम नगरीय सौर पुंज योजना द्वारा किया जायगा।

    इस योजना द्वारा प्रदेश की नागर निकायों द्वारा अपने कार्यालयों, जनसामान्य के लिए मार्ग प्रकाश एवं पेयजल की व्यवस्था किये जाने हेतु पारंपरिक विद्युत व्यवस्था  का उपयोग किया जा रहा हैए जिससे निकायों द्वारा काफी धनराशि विद्युत बिलों के भुगतान के रूप में व्‍यय करना पड़ता है तथा रात्रि में विद्युत की उपलब्धकता न होने पर वैकल्पिक व्य्वस्थाएं विशेषकर जनरेटरों के माध्यरम से मार्ग प्रकाश तथा पेयजल व्यावस्थाह किये जाने से निकायों द्वारा काफी धनराशि अतिरिक्तश रूप से व्यय करना पड़ता हैए वहीं दूसरी ओर इससे पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। नागर निकायों में परंपरागत विद्युत व्ययवस्थाह के साथ.साथ सौर ऊर्जा पावर प्लापन्टोस के माध्योम से मार्ग प्रकाश एवं पेयजल की व्ययवस्थाह किये जाने से नागर निकायों के विद्युत बिलों को जहॉ कम किया जा सकेगा वही दूसरी ओर ग्रीन इनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किये जाने के कारण जनरेटरों के माध्यरम से मार्ग प्रकाश एवं पेयजल की आपूर्ति किये जाने की विद्यमान व्यावस्था को सौर ऊर्जा पावर प्लान्टस के माध्यम से परिवर्तित कर निकाय क्षेत्र में बढ़ रहे प्रदूषण के स्तर को भी कम किया जा सकेगा। राज्यि सरकार तथा नवीन नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (M.N.R.E.) भारत सरकार द्वारा निर्धारित बेंच मार्क दरों के आधार पर तैयार की गयी परियोजनाओं से सम्बन्धित कार्य योजनाओं के क्रियान्वयन  कार्यदायी संस्थाओं द्वारा किया जायगा।

 

कान्‍हापशुआश्रययोजना:

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शहरी क्षेत्रों में अन्त्येष्टि स्थलों का विकास:

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वाह्य सहायतित योजनाएं::

आगरा जलसम्पूर्ति (पलरा) योजना:

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  आगरा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध शहर है, परन्तु आगरा नगर की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उचित गुणवत्ता का कच्चा जल उपलब्ध नहीं है। इस समस्या के दीर्घकालिक निदान हेतु अपर गंगा कैनाल के पलरा-हेडवक्र्स (बुलन्दशहर) से गंगा जल को आगरा नगर तक लाये जाने हेतु वाह्य सहायतित आगरा पेयजलापूर्ति योजना बनायी गई है। योजनान्तर्गत 150 क्यूसेक कच्चा जल लाया जायेगा, जिसमें से 140 क्यूसेक आगरा के लिये तथा 10 क्यूसेक मथुरा के लिये होगा। योजना की मूल लागत रु० 1076.98 करोड़ थी, जो पुनरीक्षित होकर रु० 2787.92 करोड की हो गई है। शासन स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास अनुभाग-5 द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय वर्ष 2013-14 में इस योजना हेतु रु० 300.00 करोड़ का बजट प्रावधान है।